LAW'S VERDICT

हटा देवेन्द्र चौरसिया हत्याकांड: बसपा नेता व पूर्व विधायक रामबाई के पति-देवर सहित 7 की उम्रकैद बरकरार, 17 आरोपी बरी

 

जबलपुर। दमोह जिले की हटा तहसील के बहुचर्चित कांग्रेस नेता देवेन्द्र चौरसिया हत्याकांड में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने बसपा नेता व पूर्व विधायक रामबाई परिहार के पति गोविन्द सिंह परिहार और देवर कौशलेन्द्र सिंह परिहार समेत 7 आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि 17 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।  जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने कहा कि जिन सात आरोपियों के नाम प्राथमिकी (FIR) में दर्ज थे और जिनकी पहचान साक्ष्यों से प्रमाणित हुई है, उनकी सजा में कोई हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। वहीं जिन 17 आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज नहीं थे, उन्हें बरी किया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि इन बरी आरोपियों के खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित न हो, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

मार्च 2019 में हुई थी हत्या
कांग्रेस नेता देवेन्द्र चौरसिया की 15 मार्च 2019 को हटा में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में हटा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 30 नवंबर 2024 को दोषी पाए गए आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसी फैसले के खिलाफ सभी अपीलें हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं।

फांसी की मांग खारिज
डिवीजन बेंच ने पीड़ित पक्ष की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं है, जिससे इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में रखकर मृत्युदंड दिया जा सके।

इनकी सजा रही बरकरार
गोविन्द सिंह परिहार, चंदू उर्फ कौशलेन्द्र सिंह परिहार, हटा जनपद अध्यक्ष इंद्रपाल पटेल, गोलू उर्फ दीपेन्द्र ठाकुर, श्रीराम शर्मा, अमजद पठान उर्फ बूथा, लोकेश सिंह।

17 आरोपी हुए बरी
राजा डॉन उर्फ राजेन्द्र, बलवीर ठाकुर, अनीश खान, मोनू तन्तुवाय, अनीश पठान, सोहेल खान, शाहरुख खान, भान सिंह परिहार, आकाश ठाकुर, संदीप तोमर, खूबचंद उर्फ नन्ना, विक्रम सिंह, सुखेन्द्र अठिया, मजहर खान, किशन सिंह, फुक्लू और शैलेन्द्र सिंह परिहार।

मुख्य साक्ष्य पर अदालत की टिप्पणी
कोर्ट ने निर्णय में कहा कि एफआईआर लेखक व प्रत्यक्षदर्शी महेश चौरसिया (PW-1) तथा घायल साक्षी सोमेश चौरसिया (PW-2) के बयानों, पहचान परेड और मृत्युपूर्व कथन (डाइंग डिक्लेरेशन) से सात आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध होती है। वहीं शेष आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य संदेह से परे प्रमाणित नहीं हो सके। मामले में शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने पैरवी की।

CRIMINAL APPEAL No. 13937 of 2024


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