नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी के फ्लडप्लेन क्षेत्र को लेकर सख़्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस इलाके में किसी भी प्रकार का नया निर्माण, अस्थायी ढांचा या आवासीय उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत ने इसे पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
कोर्ट ने कहा कि यमुना फ्लडप्लेन प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र है और यहां मानवीय हस्तक्षेप न केवल नदी के अस्तित्व के लिए ख़तरनाक है, बल्कि राजधानी दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन को भी नुकसान पहुंचाता है। न्यायालय ने प्रशासन को निर्देश दिए कि पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कराई जाए और अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था की जाए।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों पर व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।
