कुठला थाने की FIR रद्द कराने की पच्चीसिया की याचिका के साथ शिकायतकर्ता की CBI जांच वाली याचिका लिंक; हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को होगी सुनवाई
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर |
जमीन घोटाले के आरोपों को लेकर सस्पेंड हुईं CSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जिस FIR को चुनौती देकर उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, अब उसी मामले में शिकायतकर्ता ने पूरे कथित घोटाले की जांच CBI से कराने की मांग करते हुए अलग याचिका दायर कर दी है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाओं को लिंक करने के निर्देश दिए हैं। अब दोनों मामलों पर 12 अक्टूबर को एक साथ सुनवाई होगी।
FIR को चुनौती दे चुकी हैं नेहा पच्चीसिया
कटनी के कुठला थाने में दर्ज FIR को चुनौती देते हुए नेहा पच्चीसिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने दावा किया है कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है और FIR को निरस्त किया जाना चाहिए। मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे। सरकार ने कोर्ट को बताया था कि नेहा पच्चीसिया के विदेश जाने की आशंका है और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
अब शिकायतकर्ता ने मांगी CBI जांच
इसी मामले में अब एक अन्य याचिका ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। शिकायतकर्ता परिक्रमा वासी वन प्रस्थी महंत मनीद्वीपम अविनाश तिवारी की ओर से दायर याचिका में कथित जमीन घोटाले की CBI से जांच कराने की मांग की गई है। गुरुवार की सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस दूसरी याचिका की जानकारी दी गई। इसके बाद डिवीजन बेंच ने दोनों मामलों को आपस में लिंक करने के निर्देश दिए।
एक तरफ FIR रद्द कराने की मांग, दूसरी तरफ CBI जांच
इस मामले में अब हाईकोर्ट के सामने दो अलग-अलग मांगें एक साथ आ गई हैं। एक ओर सस्पेंडेड CSP नेहा पच्चीसिया ने कुठला थाने की FIR को चुनौती देते हुए इसे गलत और अपने खिलाफ झूठा मामला बताया है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने उसी प्रकरण की स्वतंत्र CBI जांच की मांग की है। दोनों याचिकाओं को लिंक किए जाने के बाद 12 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण हो गई है।
भ्रष्टाचार के आरोपों का भी जिक्र
याचिका से जुड़े घटनाक्रम में FIR दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप सामने आने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी न्यायालय द्वारा नहीं दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से पिछली सुनवाई में विदेश जाने की आशंका और लुकआउट नोटिस से संबंधित दलील भी रखी गई थी।
दोनों पक्षों के वकील रहे मौजूद
गुरुवार को हुई सुनवाई में नेहा पच्चीसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह, शासकीय अधिवक्ता अमित पाण्डेय और पैनल अधिवक्ता अद्वैत पाराशर ने पक्ष रखा। अब हाईकोर्ट दोनों याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को आगे सुनवाई करेगा।
