LAW'S VERDICT

नामांतरण के लिए 4 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया लिपिक, कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा

लोकायुक्त के ट्रैप में पकड़ा गया था कुंडम तहसील का तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी; विशेष अदालत ने 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

जमीन के नामांतरण के एवज में 4 हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले कुंडम तहसील कार्यालय के तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी को लोकायुक्त की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने आरोपी दिलीप सिंह कुलस्ते को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4-4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर कुल 6 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

नामांतरण के बदले मांगे थे 4 हजार

अभियोजन के अनुसार प्रार्थी अतुल ज्योतिकी ने ग्राम टिकरिया में जमीन खरीदी थी। जमीन के नामांतरण के सिलसिले में वह कुंडम तहसील कार्यालय पहुंचा था। आरोप था कि वहां तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी दिलीप सिंह कुलस्ते ने नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में उससे 4 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इसके बाद प्रार्थी ने मामले की शिकायत लोकायुक्त जबलपुर से की।

पहले सत्यापन, फिर तहसील कार्यालय में ट्रैप

लिखित शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने 18 मार्च 2019 को रिश्वत मांगने की शिकायत का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। इसके तहत 5 अप्रैल 2019 को कुंडम तहसील कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की गई।

टेबल की दराज में रखे थे रिश्वत के पैसे

अभियोजन के मुताबिक, ट्रैप के दौरान आरोपी ने प्रार्थी से 4 हजार रुपये लिए और उन्हें अपनी टेबल की दराज में रख दिया। लोकायुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए रिश्वत की रकम बरामद कर ली। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान विशेष अदालत में पेश किया गया।

धारा 7 और 13(2) में दोषी करार

मामले की सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से पेश साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायालय ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और धारा 13(2) के तहत दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने दोनों धाराओं में 4-4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी पर कुल 6 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने पैरवी की।

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