3 दिन के अस्पष्ट नोटिस पर अस्पताल बंद कराने की कार्रवाई पर कोर्ट ने उठाए सवाल; अगली सुनवाई तक अस्पताल चलता रहेगा, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने DGP को निर्देश
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर |
रीवा के Ayushman Nursing Home Private Limited को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अस्पताल का संचालन तत्काल बंद कराने के 24 सितंबर 2026 के आदेश पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि तब तक अस्पताल का संचालन बंद नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान अस्पताल की ओर से दलील दी गई कि प्रशासन ने अस्पष्ट आरोपों के आधार पर केवल तीन दिन का नोटिस जारी किया और जवाब का इंतजार किए बिना अस्पताल बंद करने का आदेश पारित कर दिया। हाईकोर्ट ने राज्य की ओर से दिए गए मौखिक आश्वासन को अपर्याप्त मानते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
3 दिन का नोटिस, जवाब से पहले ही बंद करने का आदेश
अस्पताल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल और अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि 24 सितंबर 2026 को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में कथित कमियों और आरोपों का पर्याप्त विवरण नहीं दिया गया और जवाब के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया। याचिकाकर्ता ने नोटिस को अस्पष्ट बताते हुए अपना जवाब और स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। आरोप है कि जवाब पर विचार करने से पहले ही उसी दिन अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।
रात 10:30 बजे हुआ था अस्पताल का निरीक्षण
याचिका के अनुसार 23 सितंबर 2026 की रात करीब 10:30 बजे अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में कथित कमियां दर्ज की गईं। अस्पताल की ओर से दावा किया गया कि निरीक्षण में रीवा कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ, एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों के अस्पताल परिसर में निरीक्षण करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया।
लाइसेंस रद्द करने के लिए तय प्रक्रिया का पालन जरूरी होने का दावा
अस्पताल की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि यदि अस्पताल में कोई कमी पाई जाती है तो उस पर मध्य प्रदेश उपचारगृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रिकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से अधिनियम की धारा 5 और धारा 6 का हवाला देते हुए कहा कि पंजीयन रद्द करने की कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। याचिकाकर्ता के अनुसार मामले में एक कैलेंडर महीने का नोटिस आवश्यक है, जबकि यहां केवल तीन दिन का अस्पष्ट नोटिस दिया गया।
करीब 30 मरीज अस्पताल में भर्ती
अस्पताल की ओर से अंतरिम राहत मांगते हुए अदालत को बताया गया कि यह 100 बेड का अस्पताल है और वहां करीब 30 मरीज भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की कि मरीजों के हित को देखते हुए अस्पताल को संचालित करने की अनुमति दी जाए।
राज्य ने कहा- आदेश लागू ही नहीं किया गया
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 24 सितंबर का अस्पताल बंद करने संबंधी आदेश अब तक लागू नहीं किया गया है और अस्पताल को संचालन की अनुमति है। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि तीन दिन के नोटिस को 30 दिन का नोटिस माना जाए और अस्पताल विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर सकता है। जवाब पर विचार करने के बाद अधिकारी अंतिम आदेश पारित करेंगे। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद 24 सितंबर के आदेश में अस्पताल का संचालन तत्काल बंद करने का स्पष्ट निर्देश था। इसलिए राज्य की ओर से दिया गया आश्वासन संतोषजनक नहीं है।
हाईकोर्ट ने बंद करने के आदेश पर लगाई रोक
अदालत ने अंतरिम तौर पर 24 सितंबर 2026 के आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक अस्पताल के 100 बेड वाले संचालन को बंद नहीं किया जाए।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने DGP को आदेश
मामले में लगाए गए आरोपों को देखते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को अस्पताल के CCTV फुटेज के साथ-साथ पास स्थित सरदार पेट्रोल पंप के CCTV फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश इसलिए दिया है ताकि निरीक्षण और उससे जुड़ी घटनाओं के रिकॉर्ड से संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रहें।
CMHO को पूरे रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को अस्पताल के खिलाफ शुरू की गई पूरी कार्यवाही से संबंधित रिकॉर्ड अगली सुनवाई तक प्राप्त करने का निर्देश दिया है। वहीं, रीवा कलेक्टर को याचिका में लगाए गए आरोपों के संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। मामले को दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
