जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने कहा- आरोपों की सच्चाई का फैसला सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में होगा
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी को कथित तौर पर तीन तलाक बोलने, दहेज की मांग और उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में पति को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने भोपाल के महिला थाने में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपों की सच्चाई का परीक्षण सबूतों के आधार पर ट्रायल कोर्ट में किया जाएगा। जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर याचिका की कार्यवाही में साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करना उचित नहीं है।
एफआईआर में गंभीर धाराएं, पति और परिजनों पर आरोप
हाईकोर्ट में यह याचिका महाराष्ट्र के नासिक निवासी सुफीयान खान व अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका के अनुसार, सुफीयान का निकाह 29 जुलाई 2021 को भोपाल में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार नियाज से हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ भोपाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर वर्ष 2023 में भोपाल के महिला थाने में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में आईपीसी की धारा 498-A, 377, 354, 506 सहपठित धारा 34, दहेज प्रतिषेध अधिनियम तथा मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत आरोप लगाए गए थे।
तीन तलाक के आरोप को पति ने बताया झूठा
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वैवाहिक विवाद का वास्तविक कारण पति-पत्नी के बीच रहने की जगह को लेकर मतभेद था। दलील दी गई कि पत्नी भोपाल में अपने मायके में रहना चाहती थी, जबकि पति अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए उनके साथ रहना चाहता था। याचिकाकर्ता की ओर से दहेज मांगने, उत्पीड़न और तीन तलाक देने के आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया गया।
हाईकोर्ट ने कहा- सबूतों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में होगा
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला और पत्नी की ओर से अधिवक्ता नईम खान ने पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई और उनमें उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाना है। अदालत ने इस स्तर पर आरोपों से जुड़े साक्ष्यों का मूल्यांकन करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
मुकदमे की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी
हाईकोर्ट के आदेश का परिणाम यह है कि संबंधित एफआईआर के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर आरोपों को सिद्ध नहीं माना है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका निर्धारण ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों और दोनों पक्षों के मामले के आधार पर होगा। अदालत ने इसी आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
