रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भोपाल लौटा छात्र, न भारत में MBBS पूरा करने का रास्ता मिला न यूक्रेन लौटने का; अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन से भारत लौटे भोपाल के एक मेडिकल छात्र की एमबीबीएस पढ़ाई अधर में अटकने के मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। छात्र का कहना है कि युद्ध के कारण उसे यूक्रेन छोड़कर भारत लौटना पड़ा, लेकिन अब न तो उसे भारत में अपनी मेडिकल पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिल रहा है और न ही वह यूक्रेन लौट पा रहा है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।
NEET-2021 के बाद यूक्रेन में लिया था MBBS में दाखिला
भोपाल के कोटरा सुल्तानाबाद निवासी अनूप पचौरी की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिका के अनुसार, छात्र ने NEET-2021 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद यूक्रेन की हॉरबाचेव्स्की टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS में दाखिले के लिए आवेदन किया था। छात्र को 14 जून 2021 को विश्वविद्यालय से आमंत्रण मिला और इसके बाद 11 अक्टूबर 2021 को वीजा जारी हुआ। उसने 3 नवंबर 2021 को विश्वविद्यालय की फीस जमा की और 7 नवंबर 2021 को यूक्रेन पहुंच गया।
फीस जमा करते ही बन गया था विश्वविद्यालय का छात्र
याचिका में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार 3 नवंबर 2021 को फीस जमा करने के साथ ही छात्र का MBBS में औपचारिक प्रवेश हो गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हो गया। युद्ध की परिस्थितियों के कारण छात्र को यूक्रेन छोड़कर भारत लौटना पड़ा।
युद्ध के बाद ऑनलाइन पढ़ाई, लेकिन डिग्री पूरी करने का रास्ता नहीं
भारत लौटने के बाद छात्र ने अपनी पढ़ाई ऑनलाइन जारी रखी। याचिका में कहा गया है कि वह अब ऐसी स्थिति में फंस गया है जहां वह न तो किसी दूसरे देश में अपनी मेडिकल पढ़ाई ट्रांसफर करा पा रहा है और न ही भारत में MBBS की डिग्री पूरी करने का रास्ता मिल रहा है। याचिका के अनुसार, यूक्रेन में जारी युद्ध के कारण पैदा हुई परिस्थितियों का सीधा असर छात्र की मेडिकल शिक्षा पर पड़ा और उसका भविष्य अनिश्चित हो गया।
2023 में हाईकोर्ट ने जारी किए थे नोटिस
इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही 8 जून 2023 को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद मामले में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया, लेकिन अब तक मामले में जवाब दाखिल नहीं होने पर कोर्ट ने सरकारों को आखिरी अवसर दिया है।
केंद्र, राज्य और NMC की ओर से वकील हुए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और अधिवक्ता नयन ज्योति नौरिया उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजवर्धन दत्त पड़रहा, केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष भटनागर और नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से अधिवक्ता मिहीर लूनावत ने पक्ष रखा।
अब 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने केंद्र और राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। अब अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। उस दिन सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के जवाब से यह स्पष्ट होने की दिशा में आगे बढ़ेगा कि युद्ध के कारण यूक्रेन से लौटे इस छात्र की मेडिकल शिक्षा को लेकर क्या कानूनी और प्रशासनिक रास्ता उपलब्ध है।
