LAW'S VERDICT

सागर शराब कांड में ठेकेदार के परिवार को बड़ी राहत, परिवार को सुरक्षा का आदेश

जहरीली शराब से 30 मौतों के बाद प्रशासन की कार्रवाई को दी गई है  चुनौती, जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने दिया अंतरिम आदेश; 5 अक्टूबर को अगली सुनवाई

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में शराब ठेकेदार के परिवार के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ठेकेदार के परिवार को सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं। जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को ठेकेदार की मां और अन्य परिजनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। पुलिस की ओर से रात में घर पर पहुंचने, तलाशी लेने, धमकी और डराने-धमकाने के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर अदालत ने सागर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को याचिकाकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी वैध आपराधिक जांच में बाधा नहीं बनेगा। पुलिस और जांच एजेंसी संबंधित एफआईआर की जांच कानून के अनुसार जारी रख सकती है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

30 मौतों के बाद परिवार पर कार्रवाई का आरोप

यह याचिका राजकुमारी कुशवाहा व अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिका में राजकुमारी ने बताया है कि उनका बेटा सिद्धार्थ कुशवाहा लाइसेंसी शराब ठेकेदार है। याचिका के अनुसार, हाल ही में जहरीली शराब पीने से करीब 30 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि मृतकों में से एक व्यक्ति ने अपने मृत्यु पूर्व बयान में कथित तौर पर बताया था कि उसने शराब सिद्धार्थ की दुकान से खरीदी थी। इसी बयान के आधार पर प्रशासन द्वारा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा रही थी। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

शराब से मौत के मामले में बेटे का नाम आने के बाद बढ़ी आशंका

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह आशंका एफआईआर नंबर 98/2026, दिनांक 6 सितंबर 2026, थाना बिनौका में दर्ज मामले के बाद उत्पन्न हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता नंबर-1 के बेटे सिद्धार्थ कुशवाहा को कथित तौर पर रोशन नामक व्यक्ति की मौत के मामले से जोड़ा गया है। आरोप है कि रोशन की मौत कथित रूप से अवैध शराब के सेवन के बाद हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सिद्धार्थ के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और कानूनी सत्यापन के अधीन हैं। यह भी बताया गया कि थाना बांदा में दर्ज एक अन्य एफआईआर क्राइम नंबर 658/2026 में सिद्धार्थ को आरोपी नहीं बनाया गया है।

पुलिस प्रेस रिलीज का भी दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अंशुमान सिंह और कार्तिक जग्गी ने 9 सितंबर 2026 की पुलिस प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें सिद्धार्थ कुशवाहा की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि जांच लंबित रहने के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने रात में याचिकाकर्ताओं के घर पहुंचकर तलाशी ली और परिवार के सदस्यों को कथित रूप से परेशान तथा धमकाया।

संपत्ति तोड़े जाने का भी आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि सिद्धार्थ कुशवाहा की कुछ संपत्तियां संबंधित अधिकारियों द्वारा पहले ही ध्वस्त की जा चुकी हैं। इसके बाद याचिकाकर्ताओं और उनकी संपत्तियों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई किए जाने की आशंका जताई गई। इन आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने अपने और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की मांग की।

राज्य सरकार ने जवाब के लिए समय मांगा

मामले में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल उपस्थित हुए। राज्य की ओर से मामले में निर्देश प्राप्त करने और उचित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने राज्य के अनुरोध को स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया।

एसपी सागर को सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश

अंतरिम उपाय के तौर पर हाईकोर्ट ने एसपी, जिला सागर को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। तलाशी, पूछताछ या किसी अन्य coercive action यानी दबावपूर्ण कार्रवाई की स्थिति में पुलिस को कानून में निर्धारित प्रक्रिया और due process का पालन करना होगा।

जांच पर कोई रोक नहीं

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण रूप से स्पष्ट किया कि अंतरिम सुरक्षा का अर्थ आपराधिक जांच पर रोक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आदेश संबंधित एफआईआर या किसी अन्य आपराधिक मामले की कानूनी जांच के रास्ते में नहीं आएगा। जांच एजेंसी कानून के अनुसार जांच जारी रखने और विधि के तहत आवश्यक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र रहेगी, बशर्ते निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।

याचिकाकर्ताओं की संलिप्तता पर कोर्ट ने नहीं दी कोई राय

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश को मामले में याचिकाकर्ताओं की कथित संलिप्तता या गैर-संलिप्तता पर कोर्ट की राय नहीं माना जाएगा। अदालत ने अंतरिम संरक्षण को केवल पुलिस द्वारा अपनाए जाने के कथित तरीके और कार्रवाई की प्रक्रिया तक सीमित रखा है। इसका उद्देश्य निष्पक्ष, स्वतंत्र और कानून के अनुरूप जांच में बाधा डालना नहीं है।

ठेकेदार का घर गिराने पर भी पहले ही रोक

इसी प्रकरण से जुड़े एक अन्य मामले में शराब ठेकेदार सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा को भी हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल चुकी है। गुरुवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने सिद्धार्थ की याचिका पर सुनवाई के बाद उनके घर को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इस मामले में शुक्रवार को आगे सुनवाई होनी थी, लेकिन केस नंबर नहीं आने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-38680-2026

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