LAW'S VERDICT

गंभीर अपराध में 60 नहीं, 90 दिन में दाखिल होगी चार्जशीट, डिफॉल्ट बेल खारिज

38.50 लाख की फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग ठगी के आरोपी को राहत नहीं; हाईकोर्ट ने कहा- IPC 409 का आरोप FIR में शुरू से है तो 90 दिन की होगी अवधि

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 38.50 लाख रुपए की फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग ठगी के मामले में आरोपी को डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी ने पुलिस द्वारा 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने को आधार बनाकर डिफॉल्ट बेल की मांग की थी।

जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में IPC की धारा 409 का मूल आरोप FIR में शुरुआत से ही मौजूद है, तो जांच और चार्जशीट दाखिल करने की वैधानिक अवधि 90 दिन होगी, 60 दिन नहीं। कोर्ट ने इसी आधार पर आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 38.50 लाख की ठगी

मामला अनुपपुर जिले के भालूमाड़ा थाना क्षेत्र का है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित विवेकानंद नगर निवासी व्यापारी उमेश कांतिलाल पटेल ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। पुलिस ने संतोष कुमार चौरसिया की शिकायत पर उमेश कांतिलाल पटेल और अंकित मालीवाल के खिलाफ 4 दिसंबर 2024 को IPC की धारा 420 और 34 के तहत FIR दर्ज की थी। आरोप है कि फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग और निवेश पर दोगुना मुनाफा देने का झांसा देकर 38.50 लाख रुपए की ठगी की गई। जांच के दौरान मामले में IPC की धारा 409 और मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हित संरक्षण अधिनियम की धारा 6 भी जोड़ी गई।

60 दिन में चार्जशीट नहीं हुई तो मांगी डिफॉल्ट बेल

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि पुलिस ने 60 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसलिए उसे कानून के तहत डिफॉल्ट जमानत का अधिकार प्राप्त हो गया है। विशेष न्यायालय ने आरोपी की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद आरोपी ने विशेष न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की।

IPC 409 में आजीवन कारावास तक की सजा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता अनुपम चतुर्वेदी ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 409 गंभीर अपराध से संबंधित है, जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने यह भी पाया कि धारा 409 से संबंधित अपराध के मूल तथ्य FIR में शुरुआत से ही मौजूद थे। इसलिए बाद में धारा 409 जोड़े जाने के आधार पर चार्जशीट दाखिल करने की अवधि को 60 दिन नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा- 90 दिन की वैधानिक अवधि लागू

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब धारा 409 का अपराध FIR में मौजूद मूल तथ्यों से ही बनता है, तो जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिनों की वैधानिक अवधि लागू होगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए आरोपी उमेश कांतिलाल पटेल की डिफॉल्ट जमानत की मांग खारिज कर दी।

फैसले का महत्व

हाईकोर्ट के इस फैसले में यह स्पष्ट किया गया है कि डिफॉल्ट जमानत के लिए चार्जशीट दाखिल करने की अवधि तय करते समय केवल FIR में दर्ज शुरुआती धाराओं को नहीं, बल्कि मूल अपराध की प्रकृति और उन तथ्यों को भी देखा जाएगा जिनसे गंभीर अपराध बनता है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें       Cr. R-2959 of 2026

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