LAW'S VERDICT

मप्र हाईकोर्ट का सरकार को आदेश- फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी करने वालों पर हो कार्रवाई

47 मामलों का हवाला देकर दाखिल हुई थी जनहित याचिका, कोर्ट बोला- प्रक्रिया में समय लगेगा, लेकिन सरकार सख्ती से कार्रवाई करे

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

मध्यप्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

सोमवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। हालांकि कोर्ट ने कार्रवाई पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की। बेंच ने कहा कि मामलों की प्रकृति को देखते हुए प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन सरकार से अपेक्षा है कि वह मामले में सख्ती से कार्रवाई करेगी।

47 मामलों में जाति प्रमाण पत्र रद्द करने की सिफारिश

यह जनहित याचिका इंदौर के गुर्जरखेड़ा निवासी पत्रकार धर्मेन्द्र शुक्ला की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि मध्यप्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर कई अधिकारी और कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष 47 मामलों का हवाला दिया गया। दावा किया गया कि इन मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी थी। इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी कार्रवाई की स्थिति

मामले की सुनवाई सोमवार को दो चरणों में हुई। सुबह की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार गुप्ता और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी उपस्थित हुए। बेंच ने उप महाधिवक्ता को सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा।

लंच के बाद फिर हुई सुनवाई

लंच के बाद मामले की दोबारा सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के पक्ष में अंतरिम स्थगन आदेश (Stay) होने के कारण कार्रवाई में देरी हुई है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्रत्येक मामले का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा और जहां कार्रवाई कानून के अनुसार आवश्यक होगी, वहां तत्काल कदम उठाए जाएंगे।

कोर्ट ने समय-सीमा तय करने से किया इनकार

याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कार्रवाई पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं की। कोर्ट ने माना कि अलग-अलग मामलों की जांच, रिकॉर्ड का परीक्षण और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में समय लग सकता है। इसलिए सरकार को एक निश्चित अवधि में पूरी कार्रवाई करने का निर्देश देना उचित नहीं होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने यह अपेक्षा जरूर जताई कि राज्य सरकार फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में गंभीरता और सख्ती के साथ कार्रवाई करेगी।

अब हर मामले की अलग-अलग होगी जांच

सरकार के जवाब के अनुसार, जिन मामलों में कार्रवाई लंबित है, उनका परीक्षण किया जाएगा। जिन मामलों में कोर्ट का स्टे प्रभावी है, उनमें संबंधित आदेशों को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब 47 बताए गए मामलों समेत ऐसे अन्य मामलों में भी सरकारी स्तर पर कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

फर्जी प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी का मुद्दा हाईकोर्ट की निगरानी में

जनहित याचिका में उठाया गया मुद्दा सरकारी सेवाओं में आरक्षण के लिए जारी जाति प्रमाण पत्रों की वैधता से जुड़ा है। हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को संबंधित मामलों में रिकॉर्ड और न्यायिक आदेशों का परीक्षण करते हुए कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करनी होगी।

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