जमीन घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े FIR मामले में बदला सुनवाई का रोस्टर, जस्टिस आनंद पाठक की डिवीज़न बेंच आज करेगी सुनवाई
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
जमीन घोटाले के आरोपों से घिरीं कटनी की सस्पेंडेड CSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। याचिका पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की दूसरी बेंच सुनवाई करेगी। सोमवार को जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने मामले को उपयुक्त बेंच के समक्ष मंगलवार को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। अब यह मामला मंगलवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस राम कुमार चौबे की डिवीज़न बेंच में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ है। नेहा पच्चीसिया ने कटनी के कुठला थाने में दर्ज FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका में उन्होंने खुद को मामले में झूठा फंसाए जाने का दावा किया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण बदला रोस्टर
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान बेंच के सामने यह तथ्य आया कि याचिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने पाया कि इस तरह के मामलों की सुनवाई का रोस्टर उनके पास नहीं है। इसके बाद अदालत ने मामले को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली बेंच के समक्ष मंगलवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सरकार ने लगाया विदेश जाने की तैयारी का आरोप
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे। सरकार ने अदालत को बताया था कि नेहा पच्चीसिया विदेश जाने की फिराक में हैं और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। राज्य की ओर से यह भी दावा किया गया था कि FIR दर्ज होने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का दायरा बढ़ा है। इन दावों पर याचिकाकर्ता का पक्ष अलग है और उन्होंने FIR को चुनौती देते हुए खुद को झूठा फंसाए जाने की बात कही है।
सोमवार की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुनवाई के दौरान बेंच ने मामले के रोस्टर से संबंधित पहलू पर विचार किया।
अब मंगलवार को दूसरी बेंच के सामने होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले को मंगलवार को उपयुक्त बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अब नई बेंच के सामने नेहा पच्चीसिया की उस याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें कटनी के कुठला थाने में दर्ज FIR को चुनौती दी गई है। मामले में आगे की कार्यवाही के दौरान FIR रद्द करने की मांग और राज्य सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित बेंच के समक्ष दलीलें रखी जाएंगी।
