LAW'S VERDICT

हाईकोर्ट कर्मचारियों पर चाकू से जानलेवा हमला: 4 दोषियों को 7-7 साल की सजा

धक्का लगने के मामूली विवाद ने लिया था हिंसक रूप, सत्र न्यायालय  ने सुनाया कड़ा फैसला

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दो कर्मचारियों पर चाकू से प्राणघातक हमला करने वाले चार आरोपियों को जिला सत्र न्यायालय ने दोषी करार देते हुए 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया है।

अपर सत्र न्यायाधीश गौरव प्रज्ञानन की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद प्रियांशु रैकवार, आशीष उर्फ नाटी ब्रजमिन, अभिषेक उर्फ छोटू सोनकर और विवेक खरे को गंभीर अपराध का दोषी पाया। इनमें से दो आरोपियों पर 6-6 हजार रुपये तथा दो अन्य पर 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

धक्का लगने से शुरू हुआ विवाद, चाकूबाजी तक पहुंचा मामला

अभियोजन के अनुसार, हाईकोर्ट कर्मचारी आयुष केवट, शुभम खत्री और महेंद्र किराड़े ललित कॉलोनी स्थित किराए के मकान में रहते थे। 3 मई 2024 की शाम को तीनों कर्मचारी ड्यूटी समाप्त कर घर लौट रहे थे। रास्ते में खरीदारी के दौरान धक्का लगने की बात को लेकर उनका आरोपियों से विवाद हो गया।

देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और आरोपियों ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। हमले में शुभम खत्री के सीने तथा महेंद्र किराड़े की पसली पर गंभीर चोटें आईं। दोनों घायलों को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार किया गया।

CCTV फुटेज से हुई आरोपियों की पहचान

घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान हुई, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

अदालत ने माना गंभीर अपराध

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक सुशील सोनी ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। अदालत ने अभियोजन के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने माना कि मामूली विवाद के बाद चाकू से किया गया हमला गंभीर और जानलेवा प्रकृति का था, जिसके लिए कठोर दंड आवश्यक है।


अदालत का आदेश देखें    ST/340/20241

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