LAW'S VERDICT

‘दान के बाद संपत्ति भगवान की, तीसरा पक्ष नहीं उठा सकता सवाल’


मैहर शारदा मंदिर आभूषण गायब होने के मामले पर हाईकोर्ट का सुनवाई से इंकार

जबलपुर। मैहर स्थित Sharda Devi Temple से सोने-चांदी के आभूषण गायब होने के मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से साफ इंकार कर दिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि दान के बाद संपत्ति भगवान की हो जाती है। यदि उसमें कोई गड़बड़ी होती है तो सवाल उठाने का अधिकार दानदाता को है, न कि किसी तीसरे पक्ष को।

पत्रकार ने लगाई थी याचिका 

याचिका मैहर के पत्रकार शारदा प्रसाद श्रीवास्तव की ओर से दायर की गई थी। आरोप था कि मंदिर में चढ़ाए गए सोने के आभूषण और करीब 2 किलो चांदी का छत्र अक्टूबर 2025 में गायब हो गए। कथित रूप से एक दानदाता की शिकायत के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद यह जनहित याचिका लगाई गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होगी और मंदिर की छवि को भी नुकसान पहुंचेगा। इसी आधार पर सार्वजनिक हित में हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
जनहित याचिका में कोर्ट से निवेदन किया गया था कि संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व पर निर्धारित समय-सीमा में निर्णय लेने तथा चोरी की घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं।

सरकार ने उठाई आपत्ति 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने याचिका की ग्राह्यता (maintainability) पर आपत्ति उठाई। डिवीजन बेंच ने माना कि याचिकाकर्ता इस मामले में “तीसरा पक्ष” है। कोई वास्तविक दानदाता स्वयं कोर्ट नहीं आया, इसलिए इस प्रकार की जनहित याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। बेंच के रुख के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली, जिस पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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