LAW'S VERDICT

जज से बदसलूकी पर फंसे वकील ने मांगी बिना शर्त माफी, हाईकोर्ट ने कहा- “लिखित में दो माफीनामा”




आपराधिक अवमानना मामले पर आज फिर होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने न्यायालय की गरिमा से जुड़े एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। बैतूल जिले के भैंसदेही में पदस्थ सिविल जज से कथित बदसलूकी करने वाले वकील को लिखित माफीनामा पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें संजिव सचदेवा और विनय सराफ शामिल हैं, ने स्पष्ट कहा कि केवल मौखिक माफी पर्याप्त नहीं होगी—हलफनामे के साथ लिखित माफीनामा दाखिल करना होगा। अब इस मामले पर बुधवार 11 फरवरी को दोबारा सुनवाई होगी।

सिविल जज से बदसलूकी के आरोप 

आपराधिक अवमानना का यह प्रकरण बैतूल जिले के भैंसदेही में पदस्थ सिविल जज महेंद्र सिंह मेहसन द्वारा भेजे गए पत्र से जुड़ा है। आरोप है कि 28 अक्टूबर 2025 को एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता उमेश जैन ने कोर्ट में बदसलूकी की और व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कीं। जज की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया कि यदि इस प्रकार की टिप्पणी करने वाले अधिवक्ता को दंडित नहीं किया गया तो इससे गलत संदेश जाएगा और ऐसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा। इस शिकायत को आपराधिक अवमानना मानते हुए हाईकोर्ट ने 9 जनवरी को अधिवक्ता उमेश जैन को नोटिस जारी किया था।

कोर्ट ने अस्वीकार की मौखिक माफ़ी 

मंगलवार को हुई सुनवाई में अधिवक्ता उमेश जैन स्वयं उपस्थित हुए और बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि माफी केवल मौखिक रूप से स्वीकार नहीं की जाएगी। बेंच ने निर्देश दिया कि अधिवक्ता हलफनामे के साथ लिखित माफीनामा पेश करें। इसके लिए वकील ने समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने एक दिन की मोहलत दी। 

 

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