हाईकोर्ट ने कहा- आदेश का पालन न हुआ तो हाजिर हों प्रमुख सचिव
जबलपुर। सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रकाश नारायण गुप्ता को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि 15 साल बाद भी न होने और पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने पूर्व में दिए आदेश का पालन न करने पर जबलपुर डीईओ घनश्याम सोनी पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है। साथ ही पिछले आदेश का पालन करने कोर्ट ने उन्हें आखिरी मोहलत दी है। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी कि एक सप्ताह में जानकारी पेश न हुई तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव 17 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर हाजिर रहें।
जबलपुर के सदर में रहने वाले याचिकाकर्ता प्रकाश नारायण गुप्ता ने यह याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि वर्ष 2010 में सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें उनकी वैध रिटायरल देनदारियां और पेंशन तक नहीं दी गईं, जिससे उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। याचिका के अनुसार, गुप्ता को GPF राशि के ₹65,000, 6वें वेतन आयोग का एरियर – ₹1,07,000, अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) के ₹1,70,000 और ग्रेच्युटी के ₹3,58,121 का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, उनकी पेंशन भी आज तक निर्धारित नहीं की गई। याचिकाकर्ता का दावा है कि वो दिव्यांग हैं और बकाया राशि कोई दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद अर्जित वैध अधिकार है।
हाईकोर्ट ने माँगा था हलफनामा
इस मामले पर 12 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के वकील को निर्देश दिया कि वे जिला शिक्षा अधिकारी, जबलपुर से स्पष्ट निर्देश लेकर शपथपत्र दाखिल करें। इसमें यह बताया जाए कि 07.02.2011 के पत्र के बाद क्या कदम उठाए गए? क्या GPF कटौती का पूरा विवरण जुटाया गया? और क्या वह जानकारी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण को भेजी गई? अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगली सुनवाई तक शपथपत्र अनिवार्य रूप से दाखिल किया जाए, अन्यथा DEO की व्यक्तिगत उपस्थिति पर विचार किया जाएगा।
नहीं पेश हुआ हलफ़नामा, कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले पर मंगलवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान जबलपुर के डीईओ घनश्याम सोनी हाजिर रहे। कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी जानकारी पेश न किये जाने पर अदालत ने 10 हजार का जुर्माना लगाकर एक सप्ताह की मोहलत प्रदान की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी कर रहे हैं।