सोम डिस्टलरीज की याचिका ख़ारिज, कमर्शियल कोर्ट के आदेश पर लगी मुहर
इंदौर। रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क और डिजाइन उल्लंघन से जुड़े एक अहम मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से सोम डिस्टलरीज को झटका लगा है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने सोम डिस्टलरीज की याचिका को खारिज करके कमर्शियल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 151 CPC के तहत ‘अनिवार्य साक्ष्य’ पेश कराने की मांग स्वीकार योग्य नहीं है, खासकर तब, जब मामला पहले ही न्यायिक रूप से विचारित हो चुका हो।
क्या है पूरा विवाद?
प्रतिवादी कंपनी माउंट एवेरेस्ट ब्रेवरिज लि. ने सोम डिस्टलरीज पर आरोप लगाया कि उसने पंजीकृत ट्रेडमार्क और कॉपीराइट का उल्लंघन करके एम्बॉस्ड बोतलों का अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग किया और पंजीकृत डिजाइन की पायरेसी की। इसके जवाब में सोम डिस्टलरीज ने धारा 151 CPC के तहत आवेदन देकर मांग की कि विवादित दो बोतलों को सबूत के रूप में पेश कराया जाए, ताकि अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) पर निर्णय हो सके।
देरी की कोशिश का आरोप
वादी की ओर से कहा गया कि प्रतिवादी शुरू से ही कार्यवाही में देरी करता रहा है। मध्यस्थता, लिखित कथन और अब साक्ष्य उत्पादन सब देरी (delay) की रणनीति है। जहां CPC में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, वहां धारा 151 की आड़ नहीं ली जा सकती
पुराने फैसले का सीधा असर
हाईकोर्ट ने Writ Appeal No. 683/2024 का रिकॉर्ड तलब कर पाया कि पहले ही डिवीजन बेंच बोतलों की पिक्टोरियल तुलना कर चुकी है। यह माना गया था कि एम्बॉस्ड लोगो को खुरचना खुद इस बात की स्वीकारोक्ति है कि ऐसा उपयोग बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसी आधार पर कमिश्नर ऑफ एक्साइज का आदेश बरकरार रखा गया था।
Order XI का तर्क भी नहीं चला
याचिकाकर्ता सोम डिस्टलरीज ने दलील दी कि Order XI Rule 1 CPC के तहत वादी को सभी दस्तावेज plaint के साथ देने चाहिए। बोतलें भी Indian Evidence Act की धारा 3 के तहत “दस्तावेज” हैं। इन दलीलों पर कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा मुकदमा खारिज करने का नहीं, बल्कि केवल धारा 151 के तहत उत्पादन का था। इसलिए यह तर्क इस चरण पर स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने साफ कहा कि कमर्शियल कोर्ट के आदेश में न तो कोई अवैधता है, न ही कोई विकृति (perversity) और न ही Article 227 के तहत पर्यवेक्षणीय अधिकार का उपयोग कर दखल देने का कोई आधार नहीं बनता है। इसके साथ डिवीज़न बेंच ने सोम डिस्टलरीज की याचिका खारिज कर दी।
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