LAW'S VERDICT

77 महीने का गुजारा भत्ता नहीं देने पर जेल गए मजदूर को हाईकोर्ट से राहत, 10% राशि जमा करते ही होगी रिहाई

आर्थिक तंगी को देखते हुए हाईकोर्ट का मानवीय रुख, बकाया 2.88 लाख रुपये की शेष राशि छह महीने में चार किश्तों में चुकाने के निर्देश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

77 महीने का गुजारा भत्ता नहीं देने के कारण 11 महीने की जेल की सजा भुगत रहे एक मजदूर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने आवेदक की दयनीय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि यदि वह बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा कर देता है, तो उसे रिहा किया जाए। शेष 90 प्रतिशत राशि चार किश्तों में छह महीने के भीतर अदा करनी होगी। अदालत ने भुगतान की शर्तों के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। यह मामला छिंदवाड़ा के कुरैशी मोहल्ला निवासी शाहिद कुरैशी से जुड़ा है, जिन्हें भरण-पोषण की बकाया राशि जमा नहीं करने पर फैमिली कोर्ट ने जेल भेजने का आदेश दिया था।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता शाहिद कुरैशी का निकाह 26 अप्रैल 2012 को मुस्लिम रीति-रिवाज से हुआ था। दंपती के दो बच्चे हैं। बाद में पारिवारिक विवाद के चलते पति-पत्नी अलग रहने लगे। पति का दावा है कि जून 2023 में उनका तलाक भी हो चुका है। इस बीच पत्नी ने फैमिली कोर्ट में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का आवेदन प्रस्तुत किया था। 21 जनवरी 2025 को फैमिली कोर्ट, छिंदवाड़ा ने एकतरफा आदेश पारित करते हुए पत्नी और बच्चों के लिए 3,750 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया।

2.88 लाख रुपये बकाया होने पर सुनाई 11 महीने की जेल

निर्धारित भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं होने पर पत्नी ने वसूली के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। फैमिली कोर्ट ने 11 मई 2026 को 77 महीने की बकाया राशि 2,88,750 रुपये जमा नहीं करने पर पति को 11 महीने के कारावास की सजा सुनाई। इस आदेश को चुनौती देते हुए शाहिद कुरैशी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

आर्थिक स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने दी राहत

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से अधिवक्ता अमित शुक्ला ने पक्ष रखा। आवेदक की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने बकाया राशि के भुगतान के लिए राहत प्रदान की। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने निर्देश दिया कि बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा करने पर आवेदक को रिहा किया जाए। शेष राशि का भुगतान छह महीने के भीतर चार किश्तों में करना होगा।

हाईकोर्ट के आदेश की प्रमुख शर्तें

  • तत्काल राहत: बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा करने पर रिहाई।

  • शेष भुगतान: बाकी 90 प्रतिशत राशि चार किश्तों में चुकानी होगी।

  • समय-सीमा: पूरी शेष राशि छह महीने के भीतर जमा करनी होगी।

  • याचिका का निराकरण: भुगतान की शर्तों के साथ हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा किया।



हाईकोर्ट का आदेश देखें      MP-4174-2026

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