LAW'S VERDICT

बिना वजह हाईकोर्ट पहुंचे दो डॉक्टरों को लगा ₹20 हजार का जुर्माना, याचिका खारिज

थीसिस गाइड बदलने और जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- गाइड ने कभी काम करने से इनकार ही नहीं किया

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर | 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पीजी मेडिकल छात्रों की एक याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। खंडवा मेडिकल कॉलेज के दो डॉक्टरों ने अपने थीसिस गाइड के स्थानांतरण के बाद नया गाइड नियुक्त करने और थीसिस जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की थी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने पाया कि संबंधित गाइड ने स्थानांतरण के बावजूद छात्रों का मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति प्राप्त कर रखी थी और उन्होंने कभी भी गाइड के रूप में काम करने से इनकार नहीं किया था। बेंच ने याचिका को पूरी तरह गलतफहमी पर आधारित मानते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रत्येक डॉक्टर को 10 हजार रुपये मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में चार सप्ताह के भीतर जमा करने होंगे।

गाइड के स्थानांतरण को बनाया याचिका का आधार

दुर्ग (छत्तीसगढ़) में रहने वाले याचिकाकर्ता डॉ. अमित बोरकर ने वर्ष 2013 में यूक्रेन की लुगांस्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी, जबकि चित्रकूट (सतना) निवासी डॉ. राम सचिव गुप्ता ने वर्ष 2016 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से एमबीबीएस पूरा किया था। दोनों डॉक्टरों ने वर्ष 2023 में NEET-PG परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मध्य प्रदेश राज्य संयुक्त पीजी काउंसलिंग में भाग लिया और खंडवा स्थित नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। डॉ. बोरकर ने 11 दिसंबर 2023 और डॉ. गुप्ता ने 4 नवंबर 2023 को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्नातकोत्तर विद्यार्थी के रूप में ज्वाइन किया। 11 दिसंबर 2023 को माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शिक्षक डॉ. सौरभ जैन को दोनों छात्रों का थीसिस गाइड नियुक्त किया गया था। बाद में 27 मई 2024 को डॉ. जैन ने खंडवा मेडिकल कॉलेज से इस्तीफा देकर मंदसौर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में सेवाएं ग्रहण कर लीं।

नए गाइड की नियुक्ति और तारीख बढ़ाने की मांग

डॉ. जैन के स्थानांतरण के बाद दोनों छात्रों ने 13 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर नया थीसिस गाइड नियुक्त करने की मांग की। उनका कहना था कि गाइड के खंडवा में उपलब्ध नहीं होने से उन्हें थीसिस जमा करने में परेशानी हो रही है। याचिकाकर्ताओं ने 27 अप्रैल 2026 के एक पत्र का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से थीसिस जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाने, नया गाइड नियुक्त करने और उनके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा- गाइड ने काम करने से कभी मना नहीं किया

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों से स्पष्ट है कि डॉ. सौरभ जैन को मंदसौर स्थानांतरण के बाद भी छात्रों का गाइड बने रहने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे साबित हो कि डॉ. जैन ने स्थानांतरण के बाद छात्रों का मार्गदर्शन करने से इनकार किया हो। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत का मुख्य आधार खंडवा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित अशोक अंगारी का 27 अप्रैल 2026 का पत्र था। अदालत के अनुसार, जब छात्रों ने अपना शोध कार्य पूरा करने के बाद थीसिस प्रस्तुत ही नहीं की थी, तब इस प्रकार का पत्र लिखने का कोई औचित्य नहीं था।

खंडवा में प्रोफेसर नहीं, मंदसौर जाना ही एकमात्र विकल्प

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों ने बताया था कि खंडवा मेडिकल कॉलेज में गाइड नियुक्त करने के लिए कोई प्रोफेसर उपलब्ध नहीं है। इसी कारण डॉ. सौरभ जैन को छात्रों का मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति दी गई थी, ताकि वे अपना थीसिस कार्य पूरा कर सकें। अदालत ने माना कि छात्रों के सामने एकमात्र व्यावहारिक कठिनाई खंडवा से मंदसौर जाकर थीसिस का काम पूरा करने की थी। इसे गाइड की अनुपलब्धता या मार्गदर्शन से इनकार का मामला बताकर अदालत में चुनौती देना उचित नहीं था।

कुलपति और रजिस्ट्रार को वारंट जारी होने का भी किया उल्लेख

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बिना किसी ठोस आधार के अदालत का रुख किया और यह प्रस्तुत किया कि गाइड की नियुक्ति नहीं होने से उन्हें परेशानी हो रही है। इस कारण मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने की स्थिति उत्पन्न हुई।

याचिका खारिज, चार सप्ताह में जमा करना होगा जुर्माना

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को पूरी तरह गलतफहमी पर आधारित मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने दोनों डॉक्टरों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे उन्हें बराबर-बराबर 10-10 हजार रुपये के रूप में मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में चार सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-16001-2026

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