LAW'S VERDICT

सीबीआई ने दहेज हत्या की धारा हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया, हाईकोर्ट ने कहा- पहले अर्जी में संशोधन करें

त्विषा शर्मा मौत मामला: पूर्व जज गिरीबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का अहम निर्देश, अर्जी में संशोधन के बाद होगी सुनवाई

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

भोपाल के त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपी पूर्व जज गिरीबाला सिंह की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत अर्जी में संशोधन करने का निर्देश दिया है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चार्जशीट में दहेज हत्या का आरोप हटाकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। जस्टिस अजय कुमार निरंकरी की पीठ ने पाया कि मौजूदा जमानत अर्जी में आरोपों में हुए इस बदलाव का उल्लेख नहीं किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले अर्जी में संशोधन कर नए आरोपों की स्थिति स्पष्ट की जाए, इसके बाद ही जमानत के मुद्दे पर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने आवेदक को संशोधित अर्जी दाखिल करने की छूट देते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर के लिए निर्धारित की है।

सीबीआई ने बदली आरोपों की तस्वीर, दहेज हत्या की धारा हटाई

मामले में शुरुआत में दहेज हत्या के आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी और उसी के अनुरूप जमानत याचिका प्रस्तुत की गई थी। हालांकि, जांच के बाद सीबीआई ने चार्जशीट में दहेज हत्या का आरोप हटाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया। हाईकोर्ट ने इसी बदलाव को जमानत याचिका में संशोधन की आवश्यकता का आधार माना। अदालत के अनुसार, जब अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों की प्रकृति बदल गई है, तो जमानत आवेदन में भी उसका स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है।

8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि वर्तमान अर्जी में यह तथ्य दर्ज नहीं है कि सीबीआई ने दहेज हत्या का आरोप हटा दिया है। इस पर हाईकोर्ट ने आवेदक को संशोधित अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधित अर्जी प्रस्तुत होने के बाद ही नए आरोप के संदर्भ में जमानत की दलीलों पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

12 मई को ससुराल में मृत मिली थीं त्विषा शर्मा

मामले के अनुसार, 33 वर्षीय त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। घटना के बाद दहेज हत्या सहित अन्य आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने आरोपपत्र में आरोपों की प्रकृति में बदलाव किया है।

पहले मिली अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने कर दी थी रद्द

घटना के बाद भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने 15 मई को पूर्व जज गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत प्रदान की थी। हालांकि, इस आदेश को हाईकोर्ट ने 27 मई को निरस्त कर दिया था। इसके बाद से गिरीबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। अब उनकी ओर से नियमित जमानत के लिए अर्जी प्रस्तुत की गई है, जिस पर हाईकोर्ट ने आरोपों में हुए बदलाव के मद्देनजर संशोधन करने को कहा है।

बचाव पक्ष ने दहेज के आरोपों को बताया निराधार

पूर्व जज की ओर से बचाव में दलील दी गई है कि मृतका अवसाद से पीड़ित थी और उन पर लगाए गए दहेज उत्पीड़न के आरोप झूठे हैं। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मृतका के पति ने उसके बैंक खाते में 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। वहीं, मृतका के पिता ने नियमित जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है। दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तृत सुनवाई संशोधित याचिका दाखिल होने के बाद होगी।

फिलहाल हाईकोर्ट ने जमानत के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत का निर्देश केवल अर्जी में आरोपों के बदले हुए स्वरूप को दर्ज कर संशोधन प्रस्तुत करने से संबंधित है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     MCRC-37723-2026

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