फुल कोर्ट फेयरवेल में भावुक हुए जस्टिस सिंह, बोले- पत्नी इंदिरा की इच्छा का सम्मान करते हुए लिया समाजसेवा का संकल्प; 8788 मामलों का किया डिस्पोजल
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर-1 में दोपहर 3:30 बजे फुल कोर्ट फेयरवेल आयोजित किया गया। समारोह के दौरान जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी इंदिरा सिंह ने एक ऐसा संकल्प लिया, जिसने समारोह में मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींचा।
जस्टिस सिंह ने घोषणा की कि वे और उनकी पत्नी देहदान करेंगे। इसके लिए दो दिन पहले उन्होंने मेडिकल कॉलेज में आवेदन भी कर दिया है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली GPF की करीब 1 करोड़ 1 लाख रुपए की राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में दान करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे ही GPF की राशि उनके खाते में आएगी, वह तत्काल उसे राहत कोष में ट्रांसफर कर देंगे।
पत्नी की इच्छा का सम्मान, समाज के लिए लिया संकल्प
अपने विदाई समारोह में जस्टिस सिंह कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी इंदिरा की इच्छा थी कि वे समाज के लिए कुछ करें। पत्नी की भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने देहदान और GPF की राशि समाजहित में देने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि GPF की राशि खाते में आते ही उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पहले जज हैं जिन्होंने अपने रिटायरमेंट के अवसर पर इस तरह का सार्वजनिक संकल्प व्यक्त किया है।
6 माह की उम्र में मां को खोया, मौसी ने बेटे की तरह पाला
जस्टिस सिंह ने अपने जीवन के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि जब वे केवल 6 माह के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता के साथ उनकी मौसी स्वर्गीय निर्मला बुच, जो मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव थीं, और मौसा स्वर्गीय महेश नीलकंठ बुच ने उन्हें बेटे की तरह पाला। अपने संबोधन में उन्होंने अपने जीवन से जुड़े इन प्रसंगों को साझा किया तो समारोह का माहौल भावुक हो गया।
कई बार भावुक हुए जस्टिस सिंह
फेयरवेल समारोह के दौरान जस्टिस सिंह कई बार भावुक नजर आए। एक मौके पर जस्टिस आनंद पाठक ने उनकी पीठ पर हाथ फेरकर उन्हें ढांढस भी बंधाया। अपने संबोधन के अंत में जस्टिस सिंह ने अपने परिचित अंदाज में कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में अपनी पत्नी इंदिरा की हर बात मानी है। अब रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए देहदान करने का उनका संकल्प है, इसलिए उनकी यह बात भी मानी जाएगी। उनकी इस बात के बाद पूरा कोर्टरूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
न्यायिक सेवा के करीब तीन साल में 8788 केसों का डिस्पोजल
फुल कोर्ट फेयरवेल को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने जस्टिस अवनीन्द्र सिंह के न्यायिक कार्यों की सराहना की। चीफ जस्टिस ने कहा कि जस्टिस सिंह को जो भी जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उन्होंने उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया। हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में करीब तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने 8788 मामलों का डिस्पोजल किया।
चीफ जस्टिस ने कहा कि किसी न्यायाधीश के कार्य का मूल्यांकन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके फैसलों की गुणवत्ता से किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सेवानिवृत्ति के बाद भी जस्टिस सिंह समाज के लिए इसी तरह सक्रिय रहेंगे।
न्यायिक व्यवस्था में बदलाव का भी किया जिक्र
जस्टिस अवनींद्र सिंह ने अपने संबोधन में न्यायिक व्यवस्था में आए तकनीकी बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले मुकदमों की सुनवाई मुख्य रूप से फिजिकल मोड में होती थी, जबकि अब वर्चुअल सुनवाई ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि वे इस संतोष के साथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं कि देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
बार पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दी शुभकामनाएं
फेयरवेल समारोह में केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, स्टेट बार काउंसिल की स्पेशल कमेटी के सदस्य दीपेन्द्र सिंह कुशवाहा, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह, हाईकोर्ट बार इंदौर के अध्यक्ष मनीष यादव, हाईकोर्ट बार ग्वालियर के अध्यक्ष पवन पाठक, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के अध्यक्ष संजय अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रविशंकर जायसवाल ने भी संबोधित किया।
सभी ने जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह को उनके सेवानिवृत्ति के बाद उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके न्यायिक योगदान को याद किया।
