LAW'S VERDICT

एक्टिंग चीफ जस्टिस रूसिया की सलाह: “वकील और OIC पिक एंड ड्रॉप सुविधा अपनाएं”

जबलपुर हाईकोर्ट के बाहर लगने वाले ट्रैफिक जाम पर अपनाया कड़ा रुख 

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वकीलों के चेम्बर्स और मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना को लेकर दायर दो जनहित याचिकाओं का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट परिसर के बाहर रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने वकीलों और कोर्ट में आने वाले अधिकारियों (OIC) से पिक एंड ड्रॉप सुविधा को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

बेंच ने कहा कि यदि अधिक लोग निजी वाहन पार्क करने के बजाय पिक एंड ड्रॉप व्यवस्था का उपयोग करें तो हाईकोर्ट के सामने खड़े वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

116 करोड़ की लॉयर्स चेम्बर्स और मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना

मामला वर्ष 2025 में दायर उन याचिकाओं से जुड़ा था, जिन्हें तत्कालीन बार अध्यक्ष धन्य कुमार जैन और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के सचिव निखिल तिवारी और अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने प्रस्तुत किया।

याचिकाओं में कहा गया था कि 4 मई 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाईकोर्ट परिसर के सामने लॉयर्स चेम्बर्स और मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना का भूमिपूजन किया था। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश सूर्यकांत, जे.के. माहेश्वरी और सतीश चंद्र शर्मा भी मौजूद थे।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार ने परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी देने के बावजूद वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं की, जिससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

सरकार ने बताया- टेंडर प्रक्रिया शुरू

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने अदालत को बताया कि 27 मई 2026 को निविदा जारी की जा चुकी है और निर्माण कार्य के लिए टेंडर खोले जा रहे हैं।

सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि वकीलों की इस महत्वपूर्ण परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

ट्रैफिक पुलिस को कार्रवाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने अव्यवस्थित पार्किंग और जाम का मुद्दा भी उठा। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि कोर्ट आने वाले सभी लोगों को आत्म-अनुशासन और जिम्मेदारी दिखानी होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सड़क किनारे मनमाने तरीके से वाहन खड़े किए जाते हैं तो ट्रैफिक पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बेंच ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए भी कहा।

फिलहाल याचिकाओं का हुआ पटाक्षेप

सरकार द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने और परियोजना के आगे बढ़ने की जानकारी मिलने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में निर्माण कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होती है या परियोजना फिर से अटकती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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