पाटन-कनेरा सिंचाई परियोजना: हाईकोर्ट ने 4 नवंबर को तय की अंतिम सुनवाई
सिवनी जिले की पाटन-कनेरा लघु सिंचाई परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में गंभीर आरोपों वाला मामला सामने आया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार में सिंचाई मंत्री रहे हुकुम सिंह कराड़ा के रिश्तेदार गणपत सिंह गुर्जर को कथित लाभ पहुंचाने के लिए स्वीकृत सिंचाई परियोजना का नक्शा बदल दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने अंतिम सुनवाई के लिए 4 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। बेंच ने संकेत दिया है कि परियोजना से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में अब सुनवाई टालने की गुंजाइश नहीं होगी।
₹9.30 करोड़ की परियोजना बदलकर ₹20 करोड़ करने का आरोप
यह मामला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के ग्राम पाटन निवासी किसान रिषी पाराशर की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि पाटन-कनेरा क्षेत्र में कृषि उद्देश्यों के लिए लघु सिंचाई टैंक बनाने की परियोजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी थी। इसकी शुरुआती लागत करीब 9.30 करोड़ रुपये थी। आरोप है कि बाद में परियोजना का नक्शा और स्वरूप बदलकर इसकी लागत करीब 20 करोड़ रुपये कर दी गई।
मंत्री के रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप है कि तत्कालीन सिंचाई मंत्री के सचिव ने मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर पुराने स्वीकृत प्रोजेक्ट में बदलाव कराया। इसके बाद नया प्लान तैयार किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि इस बदलाव से परियोजना का खर्च काफी बढ़ गया और कथित तौर पर इसका लाभ एक व्यक्ति और उसके परिवार को पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इन पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
दर्जनों किसानों की जमीन प्रभावित होने का दावा
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बदले हुए प्रोजेक्ट से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कई गरीब किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि प्रभावित किसानों के मुआवजे को भी परियोजना लागत में शामिल किया जाए तो सरकार पर पड़ने वाला वित्तीय भार और बढ़ सकता है।
2019 से हाईकोर्ट में लंबित है मामला
वैसे यह याचिका वर्ष 2019 में दाखिल की गई थी। प्रारंभ में इसकी सुनवाई हाईकोर्ट की एकलपीठ के समक्ष चल रही थी। 19 नवंबर 2024 को जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने मामले पर विचार करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता का इसमें कोई निजी हित नहीं है। चूंकि मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है, इसलिए इसे डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना उचित होगा। इसके बाद मामला डिवीजन बेंच के सामने पहुंचा।
अब 4 नवंबर को होगी अंतिम सुनवाई
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने 4 नवंबर 2026 को अंतिम सुनवाई तय की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामला एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना और व्यापक जनहित से जुड़ा है, इसलिए अब इसे अनावश्यक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
अब अगली सुनवाई में परियोजना के मूल स्वीकृत नक्शे, बाद में किए गए बदलाव, लागत में वृद्धि और किसानों की जमीन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े तथ्यों पर अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
