LAW'S VERDICT

भोपाल, इंदौर और जबलपुर के मास्टर प्लान क्यों अटके? हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव और TNCP डायरेक्टर से मांगा जवाब

व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर बताना होगा मास्टर प्लान में देरी का कारण, 25 सितंबर को अगली सुनवाई

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे प्रदेश के प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान तैयार नहीं होने को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) के डायरेक्टर से व्यक्तिगत शपथ पत्र मांगा है। डिवीज़न बेंच ने दोनों अधिकारियों को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि इन बड़े शहरों के मास्टर प्लान अब तक क्यों तैयार नहीं हो पाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

पांच साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे और रजत भार्गव की ओर से यह याचिका  वर्ष 2024 में दायर की गई है। याचिका में मुख्य रूप से जबलपुर के मास्टर प्लान को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जबलपुर शहर वर्तमान में बिना वैध नए मास्टर प्लान के विकास की प्रक्रिया से गुजर रहा है। उनके अनुसार, पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2021 में अपनी अवधि पूरी कर चुका है, लेकिन इसके बाद करीब पांच वर्ष बीतने के बावजूद नया मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया।

शहर का दायरा बढ़ा, लेकिन प्लान पुराना

याचिका के अनुसार, जबलपुर का अंतिम मास्टर प्लान 1 अक्टूबर 2008 को लागू हुआ था। उस समय शहर का विकास क्षेत्र करीब 245 वर्ग किलोमीटर और 109 गांवों तक सीमित था। बाद में वर्ष 2014 की अधिसूचना के बाद विकास क्षेत्र का दायरा बढ़कर करीब 400 वर्ग किलोमीटर और 171 गांवों तक हो गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि क्षेत्रफल और शामिल गांवों की संख्या में इतना बड़ा बदलाव होने के बावजूद पुराने मास्टर प्लान के आधार पर विकास की स्थिति व्यावहारिक नहीं रह गई है।

नया मास्टर प्लान नहीं, तो विकास कार्य प्रभावित

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने डिवीजन बेंच को बताया कि नया मास्टर प्लान नहीं होने से शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि मास्टर प्लान के अभाव में लोगों को अपनी जमीन विकसित करने में भी परेशानी हो रही है। वर्ष 2014 में विकास क्षेत्र में शामिल किए गए करीब 60 गांव भी अब तक समुचित विकास योजना का इंतजार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट का सवाल- सिर्फ जबलपुर ही नहीं, भोपाल-इंदौर भी क्यों अटके?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को केवल जबलपुर तक सीमित नहीं माना। डिवीजन बेंच ने कहा कि भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान भी अब तक लंबित हैं। इसी को देखते हुए अदालत ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और TNCP डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल कर देरी का कारण बताने का निर्देश दिया है। अब अधिकारियों के शपथ पत्र से यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में देरी क्यों हुई और इसे पूरा करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

25 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन प्रमुख सचिव और TNCP डायरेक्टर की ओर से दाखिल किए जाने वाले व्यक्तिगत शपथ पत्र पर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

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