LAW'S VERDICT

सरकार की अपील पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, पूछा—नीति बनाने के बजाय अपील क्यों?


सिंगल बेंच ने कहा था- सरकारी जमीनों को बचाने 6 माह में बने नीति,  इस फैसले को चुनौती देकर सरकार ने की है अपील

जबलपुर।  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान सरकार की अपील पर कड़ी टिप्पणी देखने को मिली। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया—जब सिंगल बेंच ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया था, तो फिर उसके खिलाफ अपील दाखिल करने की क्या जरूरत थी? कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि उद्देश्य सरकारी जमीनों की सुरक्षा है, तो नीति बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए। अपील दायर करने के पीछे सरकार का तर्क क्या है, यह एक सप्ताह में स्पष्ट किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की गई है।

फौजी पड़ाव की जमीन से जुड़ा है मामला

मामला नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) जिले के सिवनी मालवा से जुड़ा है। यहां रहने वाली अंजू ठाकुर व अन्य ने वर्ष 2015 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके पूर्वजों ने जिस जमीन को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र से खरीदा था, वह राजस्व रिकॉर्ड में “फौजी पड़ाव” के नाम से दर्ज थी। इस जमीन का इस्तेमाल पहले सेना के कैंप के रूप में होता था। मामला सिविल कोर्ट से लेकर राजस्व मंडल तक गया। 24 फरवरी 2015 को राजस्व मंडल ने नामांतरण का दावा खारिज कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

सिंगल बेंच ने सरकार को नीति बनाने कहा 

18 नवंबर 2025 को जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि  राज्य सरकार 6 माह के भीतर सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाए। निचली अदालत की डिक्री के अनुसार, फिलहाल डिक्री धारकों या उनके वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएं। सभी पक्ष 8 दिसंबर को सिविल कोर्ट में उपस्थित हों। यदि सरकार मुकदमा जीतती है तो रिकॉर्ड में पुनः सरकार का नाम दर्ज किया जा सकता है। 

यानी कोर्ट ने संतुलित रास्ता सुझाया था—पहले नीति बनाइए, फिर कानूनी प्रक्रिया से हक तय कीजिए।

डिवीजन बेंच ने जमकर जताई नाराजगी

अब जब सरकार ने उसी आदेश के खिलाफ अपील दायर की, तो डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान आश्चर्य जताया। बेंच ने पूछा कि क्या सरकार नीति बनाने से बचना चाहती है या फिर उसे सिंगल बेंच के निर्देशों में कोई कानूनी त्रुटि दिख रही है? बेंच ने कहा-  यह ऐसा मामला है जिसमें सरकार को अपनी ही जमीनों को बचाने पुख्ता नीति बनाना थी। परन्तु ऐसा लगता है कि यह अपील ऐसे किसी अफसर के कहने पर दाखिल की गई, जो नहीं चाहता कि सरकारी जमीन बचे।

19 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल हाईकोर्ट का रुख साफ है—सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर कोई ढिलाई नहीं चलेगी।


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